Thursday, September 10, 2026

||श्री परमात्मने नम: || विवेक चूडामणि (पोस्ट.०७) अधिकारी निरूपण अधिकारिणमाशास्ते फलसिद्धिर्विशेषत: | उपाया देशकालाद्या: संत्यस्मिन्सहकारिण: ||१४|| (विशेषत: अधिकारी को ही फल सिद्धि होती है; देश, काल आदि उपाय भी उसमें सहायक अवश्य होते हैं ) अतो विचार: कर्तव्यो जिज्ञासोरात्मवस्तुन: | समासाद्य दयासिंधुं गुरुं ब्रह्मविदुत्तमम् || १५|| (अत: ब्रह्मवेत्ताओं में श्रेष्ठ दयासागर गुरुदेव की शरण में जाकर जिज्ञासु को आत्मतत्त्व का विचार करना चाहिए) मेधावी पुरुषो विद्वानूहापोहविचक्षण: | अधिकार्यात्मविद्यायामुक्तलक्षणलक्षित: ||१६|| (जो बुद्धिमान हो,विद्वान हो और तर्क-वितर्क में कुशल हो, ऐसे लक्षणों वाला पुरुष ही आत्मविद्या का अधिकारी होता है) विवेकिनो विरक्तस्य शमादिगुणशालिन: | मुमुक्षोरेव हि ब्रह्मजिज्ञासायोग्यता मता ||१७|| (जो सदसद्विवेकी, वैराग्यवान,शम-दमादि षट्सम्पत्तियुक्त और मुमुक्षु हो उसी में ब्रह्मजिज्ञासा की योग्यता मानी गयी है) नारायण ! नारायण !! शेष आगामी पोस्ट में ---गीताप्रेस,गोरखपुर द्वारा प्रकाशित “विवेक चूडामणि”..हिन्दी अनुवाद सहित(कोड-133) पुस्तकसे

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